Indicators on मैं हूँ ५ बार बोलो You Should Know



Right here’s a simple way to take a look at it. We understand by means of our experience and whatever is recurring and strengthened by reaction, focus, or exposure in the environment gets a pattern that gets saved so we don’t have to consider it. Designs are switched on by strong emotions, especially when we understand that lifestyle isn’t Risk-free, we’re not sufficient, we’ll be punished if we’re various, etc.

ऊंट ने कहा, "अच्छा, मैं देखू पानी कितना गहरा है।"

पति ने जवाब दिया, "कबतक ये शिकायतें किये जायेगी? हमारी उम्र ही क्या ऐसी ज्यादा रह गयी है! बहुत बड़ा हिस्सा बीत चुका है। बुद्धिमान आदमी की निगाह में अमीर और गरीब में कोई फर्क नहीं है। ये दोनों दशाएं तो पानी की लहरें हैं। आयीं और चली गयीं। नदी की तरेंग हल्की हो या तेज, जब किसी समय भी इनको स्थिरता नहीं तो फिर इसक जिक्र ही क्या?

स्त्री ने जब देखा कि उसका पति नाराज हो गया है तो झट रोने लगी। फिर गिड़गिड़ाकर कहने लगी, "मैं सिर्फ पत्नी ही नहीं बल्कि पांव की धूल हूं। मैंने तुम्हें ऐसा नहीं समझा था, बल्कि मुझे तो तुमसे और ही आशा थी। मेरे शरीर के तुम्हीं मालिक हो और तुम्हीं मेरे शासक हो। यदि मैंने धैर्य और सन्तोष को छोड़ा तो यह अपने लिए नहीं, बल्कि तुम्हारे लिए। तुम मेरी सब मुसीबतों और बीमारियों की दवा करते हो, इसलिए मैं तुम्हारी दुर्दशा को नहीं देख सकती। तुम्हारे शरीर की सौगन्ध, यह शिकायत अपने लिए नहीं, बल्कि यह सब रोना-धोना तुम्हारे लिए है। तुम मुझे छोड़ने का जिक्र करते हो, यह ठीक नहीं हैं।"

इतने सेव खाने की हिम्मत होती और न उल्टी होने की नौबत आती है। इलिए मैं तो तेरे दुर्वचनों को भी सहन करता रहा। कारण बताना उचित नहीं था और तुझे छोड़ना भी मुनासिब नही था।"

हुदहुद ने जवाब दिया, "ऐ राजन्, मुझे निर्दोश गरीब के विरुद्ध शत्रु की शिकायतों पर ध्यान न दीजिए। अगर मेरा दावा गलत हो तो मेरा यह सिर हाजिर है। अभी गर्दन उड़ा दीजिए। रही बात मृत्यु और परमात्मा की आज्ञा से गिरफ्तारी की, सो इसका इलाज मेरे क्या, किसी के भी पास नहीं है। यदि ईश्वर की इच्छा मेरी बुद्धि के प्रकाश को न बुझाये तो मैं उड़ते-उड़ते ही फन्दे और जाल को भी देख लूं। परन्तु जब ईश्वर की मर्जी ऐसी ही हो जाती है तो अकल पर पर्दा पड़ जाता हैं। चन्द्रमा काला पड़ जाता है और सूजर ग्रहण में आ जाता है। मेरी बुद्धि और दृष्टि में यह ताकत नहीं है कि परमात्मा की मर्जी का मुकाबला कर सके।"

हजरत मूसा ने ईश्वर से प्रार्थना की, "ऐ प्रभु! मालू होता है कि यह बुद्धिमान मनुष्य शैतान के हाथ में more info खेल रहा है। यदि मैं इसे पशुओ की बोली सिखा दूं तो इसका अनिष्ट होता है और यदि न सिखऊं तो इसके हृदय को ठेस पहुंचती है।" click here ईश्चर की आज्ञा हुई, "ऐ मूसा!

"सवा लाख से एक लडाऊं तभी गोबिंद सिंह नाम कहाउँ !!"

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सूफी ने जी में कहा, "जो कुछ मेरे साथ होनी थी, वह तो हो चुकी; परन्तु मेरे साथियो! जरा अपनी खबर लो। तुमने मुझको पराया समझा, हालांकि मैं इस दुष्ट माली से ज्यादा पराया न था। जो कुछ मैंने खाया है, वही तुम्हें भी खाना है और सच बात तो यह है कि धूर्तों को ऐसा दण्ड मिलना चाहिए।"

वाहेगुरु वाहेगुर वाहेगुर वाहेगुरु वाहेगुर आप सब हमेशा ख़ुश रहें ।

गृहस्वामी ने यह आवाज सुनी तो उसे डर लगने लगा। सोचने लगा, शायद दूसरे चोर ने किसी को मार डाला है या हो सकता है, वह मुझपर भी पीछे से टूट पड़। हो सकता है कि बाल-बच्चों पर भी हाथ साफ करे। तो फिर इस चोर के पकड़ने website से क्या लाभ होगा?

This baani was spoken by Expert Gobind Singh ji. If you are not acquiring any satisfaction from everyday living, Here is the bani to recite.

कितनी जल्दी भुला दिया हमने इस शहादत को ?

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